भारत देश में कैंसर लगातार बढ़ता जा रहा है, आज हर सात व्यक्तियों में से एक को कैंसर है।
यदि हमने कैंसर के कारण नहीं हटाए तो आगे के समय में हर चार में से एक व्यक्ति को कैंसर होगा,
ऐसा वैज्ञानिकों का अंदाजा है।
जहरीले कीटनाशक जो हमारे फल, सब्जी और अनाज पर छिड़के जाते हैं, कैंसर का प्रमुख कारण है।
सन 1960 के पहले हमारे देश में जहरीले कीटनाशक नहीं थे, और खेती इतनी लहराती हुई होती थी,
कि विदेशी लोगों की आँखें चौंधिया जाती थीं।
हमारे देश को जहरीले कीटनाशक की जरूरत ही नहीं थी। जबरदस्ती हमारी फसलों को बदलकर और
अलग तरह के बीजों को भारत में लाकर, हरित क्रांति के नाम पर पश्चिमी देशों ने दूसरे
विश्वयुद्ध के बचे हुए केमिकल्स को कीटनाशक में परिवर्तित कर, हमारे देश में भेजकर,
स्वयं का आर्थिक लाभ सुनिश्चित कर लिया और हमारा देश अनेक समस्याओं से घिर गया।
आज हमारा किसान बिना जहरीले कीटनाशकों की खेती करना ही भूल गया है।
अगर देश को कैंसर से मुक्त करना है तो समाधान ढूंढना ही पड़ेगा!
सिक्किम राज्य ने 2013 से अभियान चलाकर पांच सालों में राज्य को जहरीले कीटनाशक से मुक्त
कर दिया है। सिक्किम राज्य बाकी सारे राज्यों के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण साबित हुआ है।
हर राज्य को हर साल जहरीले कीटनाशक 20% कम करके, 5 साल में अपनी जमीन को जहरीले कीटनाशकों
से मुक्त करना है। उसके 3 साल बाद जमीन की उर्वरक शक्ति तीन गुना ज्यादा बढ़ जाएगी।
किसान के इस कठिन समय में सरकार और देशवासियों को किसानों का साथ देना होगा।
श्रीलंका के उदाहरण से हम यह जान गए हैं कि 1 दिन अचानक कीटनाशक हटाने से देश में अन्न
संकट पैदा होगा। इसलिए यह काम हम धीरे-धीरे 3 से 5 साल में करना चाहते हैं।
सरकार की तरफ से अत्यंत जहरीले कीटनाशक पर रोक लगाना है। कम जहरीले कीटनाशकों की सब्सिडी
खत्म करके दाम बढ़ाना है और जैविक कीटनाशकों का प्रचलन बढ़ाना है।
कृषि महाविद्यालयों में जैविक कीटनाशकों का प्रायोगिक ज्ञान देना है।
हर अनाज, फल और सब्जी मंडी के बाहर जहरीले कीटनाशक की जांच की व्यवस्था अनिवार्य रूप से
लागू करना होगा।
देश के हर बच्चे, बूढ़े और जवान को यह जानकारी होना जरूरी है कि हमारी खाने की थाली में से,
अदृश्य जहर हटाना जरूरी है और इस लड़ाई में हर एक देशवासी का योगदान प्रार्थनीय है।
